मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है । गर्भ से लेकर श्मशान घाट तक समाज एक एक व्यक्ति के साथ खड़ा रहता है । जब मनुष्य गर्भ में रहता है तो समाज और परिवार के लोग उसके धरती पर सकुशल आगमन और उसकी माँ की कुशलता के लिए ईश्वर से दुआ मांगते है । जन्म के समय माँ प्रसव पीड़ा से मुर्चित सी रहती है और उस समय नवजात को गोद में उठाने वाली गावं की चमॆइन ( चमार की पत्नी ) होती है जो उस नवजात शिशु को नवजीवन प्रदान करती है । कही कही चमॆइन की जगह पर गाँव की औरते या फुआ या परिवार की कोई बुजुर्ग औरत रहती है । आपका नार काटती है और आपको साफ सुथरा करके , इस धरा पर आपकी नई जीवन की शुरुआत कराती है । जब आप कुछ बड़े होते है तो आपको पूरा मोहल्ला और परिवार के लोग आपको गोद में लेकर घुमाते है और आपको खेलाते है उस दरम्यान न जाने कितने लोगो के मुंह और शारीर पर आपने पेशाब किया होगा । सभी ने आपके इस गलती को माफ करके आपके लिए लम्बी उम्र और आपकी उज्वल भविष्य की प्रभु से दुआए मांगी ।
जब आप अपने पैरों पर चलने लगे तो आपकी गलतिया बढ़ती गयी । खेतो में घूम कर कितने किसानो का फसल नुकसान किया आपने । हर किसान आपको हल्की डांट के साथ माफ किया । पड़ोसियों के कितने फूल के गमलों को आपने तोडा और पडोसी ख़ुशी के साथ आपको माफ किया । समाज ने आपकी छोटी बड़ी सभी गलतियों को माफ किया ।
पिता , चाचा , बड़ा भाई , दादा और अन्य परिवार के सदस्यों को जब भी आम के बगीचों में कोई आम मिलता तो उस पके आम को ओ खुद न खाकर आपके लिए लाते थे । आपका भाई हर पल आपके साथ चट्टान की तरह खड़ा रहता था कितना प्यार करता था वह आपको ।
आपकी बहन अपनी हिस्से की चीजे भी आपके खाने के लिए रखती थी । आपकी लम्बी उम्र और सुन्दर भविष्य के लिए माँ के साथ न जाने कितने त्योहारों को किया करती थी । हर देवी देवताओं से आपके लिय मन्नत मांगती थी ।
इस समाज के लोगो ने आपको खेलने के लिए खेल का मैदान दिया और गर्मी के दिनों में सूर्य की तपती धुप में शीतलता प्रदान करने के लिया घना बगीचा दिया ।
बचपन का वह शिक्षक जिसने उंगली पकड़कर क ,ख ग सिखाकर आपके शिक्षा की बुनियाद को मजबूत किया
। न जाने कितने त्याग और बलिदान इस समाज ने आपके लिए किया।
लेकिन आपने इस समाज को क्या दिया । क्याकिया आपने उस माँ सादृश महिला के लिए जिसने आपको जन्म के समय अपनी गोद में उठाया था । भूल गए उस भाई और बहन को अपनी व्यस्तता का बहाना बनाकर । भूल गये उस चाचा को जिसके चेहरे पर किलकारिय मारते हुए न जाने कितनी बार अपने थूका था । इतना ही नहीं आप अपनी चमचमाती गाड़ी को चलाने के लिए गाँव के उस मखमली दूब से आच्छादित पगडण्डी को कंक्रीट का निर्जीव सड़क बना दिया । आपने उस हरे भरे बगीचों को उजाड़कर अपने लिए कंक्रीट और लोहे का जंगल बना लिया ।
कुछ तो समाज और परिवार के लिए सोचे नहीं तो आप अकेले पड़ जायेंगे ।
जब आप अपने पैरों पर चलने लगे तो आपकी गलतिया बढ़ती गयी । खेतो में घूम कर कितने किसानो का फसल नुकसान किया आपने । हर किसान आपको हल्की डांट के साथ माफ किया । पड़ोसियों के कितने फूल के गमलों को आपने तोडा और पडोसी ख़ुशी के साथ आपको माफ किया । समाज ने आपकी छोटी बड़ी सभी गलतियों को माफ किया ।
पिता , चाचा , बड़ा भाई , दादा और अन्य परिवार के सदस्यों को जब भी आम के बगीचों में कोई आम मिलता तो उस पके आम को ओ खुद न खाकर आपके लिए लाते थे । आपका भाई हर पल आपके साथ चट्टान की तरह खड़ा रहता था कितना प्यार करता था वह आपको ।
आपकी बहन अपनी हिस्से की चीजे भी आपके खाने के लिए रखती थी । आपकी लम्बी उम्र और सुन्दर भविष्य के लिए माँ के साथ न जाने कितने त्योहारों को किया करती थी । हर देवी देवताओं से आपके लिय मन्नत मांगती थी ।
इस समाज के लोगो ने आपको खेलने के लिए खेल का मैदान दिया और गर्मी के दिनों में सूर्य की तपती धुप में शीतलता प्रदान करने के लिया घना बगीचा दिया ।
बचपन का वह शिक्षक जिसने उंगली पकड़कर क ,ख ग सिखाकर आपके शिक्षा की बुनियाद को मजबूत किया
। न जाने कितने त्याग और बलिदान इस समाज ने आपके लिए किया।
लेकिन आपने इस समाज को क्या दिया । क्याकिया आपने उस माँ सादृश महिला के लिए जिसने आपको जन्म के समय अपनी गोद में उठाया था । भूल गए उस भाई और बहन को अपनी व्यस्तता का बहाना बनाकर । भूल गये उस चाचा को जिसके चेहरे पर किलकारिय मारते हुए न जाने कितनी बार अपने थूका था । इतना ही नहीं आप अपनी चमचमाती गाड़ी को चलाने के लिए गाँव के उस मखमली दूब से आच्छादित पगडण्डी को कंक्रीट का निर्जीव सड़क बना दिया । आपने उस हरे भरे बगीचों को उजाड़कर अपने लिए कंक्रीट और लोहे का जंगल बना लिया ।
कुछ तो समाज और परिवार के लिए सोचे नहीं तो आप अकेले पड़ जायेंगे ।
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