Tuesday, 13 March 2012

आजाद हिंदुस्तान के लोकतंत्र में स्वर्गीय पंडित नेहरू जी का लगाया हुआ वंशवाद का पौधा आज वट वृक्ष बन चूका है . वंशवाद शुरू करने के पीछे नेहरू जी की  नियत ये थी की हिंदुस्तान की जनता को भारत का प्रधान मंत्री की कुर्सी से वंचित रखा जाय . वही हुआ जो नेहरू चाहते थे उनके वंश के तमाम लोग भारत का प्रधान मंत्री बने और देश की जनता को उस कुर्सी से दूर  रखा गया और इसके साथ ही नेहरू जी  का सपना भी साकार हो गया लेकिन यह वंश  वाद और भयानक रूप ले लिया जब नेहरू जी के  नक़्शे  कदम पर हिंदुस्तान के छोटे बड़े तमाम दल के नेताओं  ने चलते हु वंशा वाद को अपना लिया . और हिंदुस्तान की जनता को न सिर्फ प्रधान मंत्री की कुर्सी से दूर  रखा बल्कि राज्यों के मुख्या मंत्री की कुर्सी से भी दूर कर दिया . अब भारत की गरीब जनता का बेटा न  कभी प्रधान मंत्री और नहीं कभी  मुख्या मंत्री बन सकता है प्रधान मंत्री राहुल गाँधी जी बनेंगे या फिर किसी बड़े नेता का बेटा और मुख्या मंत्री मुलायम सिंह जी का बेटा बनेंगे या फिर फारुख अब्दुला का बेटा बनेंगे .
  गरीब जनता आप गरीब ही रहेंगे अगर समय रहते नहीं चेतेंगे
     जय हो लोकतंत्र की

Sunday, 11 March 2012

एक रजा अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता था लेकिन पत्नी अपने राजा से नहीं बल्कि अपने ही दरबार के एक दरवारी से प्यार कराती थी और दरबारी  रानी से नहीं बल्कि एक वेश्या से प्यार करता था और वेश्या दरबारी से नहीं बल्कि अपने राज्य के राजा से प्यार करती थी . कहानी इस प्रकार है ----- एक दिन राजा के दरबार में एक संत आया और उसने राजा को एक फल ( fruit ) दिया जो उसने लम्बे तपस्या के पश्चात पाया था फल की विशेषता थी की जो इस फल की खायेगा ओ चीर  युवा और अमर रहेगा . फल लेने के बाद राजा ने सोचा मैं यह फल अपनी पत्नी को खिलायुन्गा जिससे ओ चिर युवा और अमर रहेगी . तो राजा ने फल अपनी प्यारी पत्नी को दे दिया फल पत्नी पाकर सोचने लगी मै खाकर क्या करूंगी इस फल की मैं अपने प्रेमी दरबारी को दे देती हूँ जिसे खाकर ओ चिरयुवा  और अमर रहेगा . दरबरी को जब फल मिला तो सोचने लगा की मैं क्यों न इस फल को उस वेश्या को दे दू जिसके पास मैं हमेशा जाता हूँ. और  उसने इस फल को वेश्या को दे दिया . जब ओ फल  वेश्या को मिला ओ सोचने लगी की मै इस फल को खाकर क्या करुँगी मुझे जिन्दगी भर कुकर्म करना पड़ेगा इसलिए इस फल को मैं नही खायूंगी . मेरा राज्य का राजा सबसे अच्छा है ओ जनता  का पालन पोषण सही तरीके सा करता है इसलिए यह फल राजा को दे देना चाहिए इस प्रकार वेश्या  उस फल को लेकर राजा के पास आ जाती है और राजा को बताती है . राजा फल को देखकर और सारी कहानी सुनकर आश्चर्य चकित हो जाता है .

Wednesday, 7 March 2012

उतरप्रदेश और उतराखंड  में भारतीय जनता पार्टी की हार से यह बिलकुल स्पष्ट हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी के लिए दिल्ली की गद्दी कोसो दूर है अपने मन को सांत्वना देने के लिए पार्टी का नेता कुछ भी कह ले लेकिन सचाई यह है की उतरप्रदेश और उतराखंड में पार्टी का सामाजिक आधार ख़त्म हो चूका है . भारतीय जनता पार्टी में दूसरी पंक्ति के तमाम नेता  विद्वान् है लेकिन नरेन्द्र मोदी को छोड़ कर कोई भी नेता चाहे जेतली जी हो , राजनाथ सिंह जी हो , मुरली मनोहर जोशी हो , रवि शंकर प्रसाद हो किसी भी नेता की छवि रास्ट्रीय छवि नहीं बन पाई है चाहे वो माने या न माने लेकिन जनता के लिए  सचाई यही है . श्री नरेन्द्र मोदी जी का जनाधार तमाम नेताओ की तुलना में अधिक है लेकिन दूसरी पंक्ति का कोई  भी नेता  नरेन्द्र मोदी को नेता मानाने से हिचकिचाते है .अगर नरेंद्र मोदी जी को प्रधान मंत्री के रूप पेश कर के चुनाव लड़ा जाय तो पार्टी की जित हो सकती है
कल मैंने गडकरी साहब की प्रेस कांफ्रेंस देखा .प्रेस कांफ्रेंस के दौरान जिस तरह रविशंकर प्रसाद जी पत्रकारों को सवाल पूछने  के मौका दे रहे थे तो ऐसा लगता था की प्रेस कांफ्रेंस गडकरी की नहीं रवि शंकर प्रसाद की हो रही है जिस तारा गडकरी साहव को रोकते थे उसको देखने से ऐसा ही लगता था की पार्टी की वरिष्ट नेता गडकरी नहीं रवि शंकर प्रसाद है .मैंने  वहुत से पार्टी अधक्ष की कांफ्रेंस को देखा है लेकिन किसी भी पार्टी में ऐसा नहीं होता है . अगर वरिष्ट नेता बोलता है तो कोई भी नेता बिच में नहीं बोलता है लेकिन रवि शंकर प्रसाद को क्या सूझ रहा था वो तो वहीजनते होंगे . vataनुकुलित कच्छ में योजना बनाकर और हेलीकाप्टर से मंच पर आकार प्रवचन दे देने से पार्टी की कभी जित नही हो सकती है जितने ले लिए के लिए गावों में जाना होगा ग्रामीण लकड़ो को पार्टी से जोड़ना होगा तभी जाकर जित हो सकती है .