उतरप्रदेश और उतराखंड में भारतीय जनता पार्टी की हार से यह बिलकुल स्पष्ट हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी के लिए दिल्ली की गद्दी कोसो दूर है अपने मन को सांत्वना देने के लिए पार्टी का नेता कुछ भी कह ले लेकिन सचाई यह है की उतरप्रदेश और उतराखंड में पार्टी का सामाजिक आधार ख़त्म हो चूका है . भारतीय जनता पार्टी में दूसरी पंक्ति के तमाम नेता विद्वान् है लेकिन नरेन्द्र मोदी को छोड़ कर कोई भी नेता चाहे जेतली जी हो , राजनाथ सिंह जी हो , मुरली मनोहर जोशी हो , रवि शंकर प्रसाद हो किसी भी नेता की छवि रास्ट्रीय छवि नहीं बन पाई है चाहे वो माने या न माने लेकिन जनता के लिए सचाई यही है . श्री नरेन्द्र मोदी जी का जनाधार तमाम नेताओ की तुलना में अधिक है लेकिन दूसरी पंक्ति का कोई भी नेता नरेन्द्र मोदी को नेता मानाने से हिचकिचाते है .अगर नरेंद्र मोदी जी को प्रधान मंत्री के रूप पेश कर के चुनाव लड़ा जाय तो पार्टी की जित हो सकती है
कल मैंने गडकरी साहब की प्रेस कांफ्रेंस देखा .प्रेस कांफ्रेंस के दौरान जिस तरह रविशंकर प्रसाद जी पत्रकारों को सवाल पूछने के मौका दे रहे थे तो ऐसा लगता था की प्रेस कांफ्रेंस गडकरी की नहीं रवि शंकर प्रसाद की हो रही है जिस तारा गडकरी साहव को रोकते थे उसको देखने से ऐसा ही लगता था की पार्टी की वरिष्ट नेता गडकरी नहीं रवि शंकर प्रसाद है .मैंने वहुत से पार्टी अधक्ष की कांफ्रेंस को देखा है लेकिन किसी भी पार्टी में ऐसा नहीं होता है . अगर वरिष्ट नेता बोलता है तो कोई भी नेता बिच में नहीं बोलता है लेकिन रवि शंकर प्रसाद को क्या सूझ रहा था वो तो वहीजनते होंगे . vataनुकुलित कच्छ में योजना बनाकर और हेलीकाप्टर से मंच पर आकार प्रवचन दे देने से पार्टी की कभी जित नही हो सकती है जितने ले लिए के लिए गावों में जाना होगा ग्रामीण लकड़ो को पार्टी से जोड़ना होगा तभी जाकर जित हो सकती है .
कल मैंने गडकरी साहब की प्रेस कांफ्रेंस देखा .प्रेस कांफ्रेंस के दौरान जिस तरह रविशंकर प्रसाद जी पत्रकारों को सवाल पूछने के मौका दे रहे थे तो ऐसा लगता था की प्रेस कांफ्रेंस गडकरी की नहीं रवि शंकर प्रसाद की हो रही है जिस तारा गडकरी साहव को रोकते थे उसको देखने से ऐसा ही लगता था की पार्टी की वरिष्ट नेता गडकरी नहीं रवि शंकर प्रसाद है .मैंने वहुत से पार्टी अधक्ष की कांफ्रेंस को देखा है लेकिन किसी भी पार्टी में ऐसा नहीं होता है . अगर वरिष्ट नेता बोलता है तो कोई भी नेता बिच में नहीं बोलता है लेकिन रवि शंकर प्रसाद को क्या सूझ रहा था वो तो वहीजनते होंगे . vataनुकुलित कच्छ में योजना बनाकर और हेलीकाप्टर से मंच पर आकार प्रवचन दे देने से पार्टी की कभी जित नही हो सकती है जितने ले लिए के लिए गावों में जाना होगा ग्रामीण लकड़ो को पार्टी से जोड़ना होगा तभी जाकर जित हो सकती है .
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