एक रजा अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता था लेकिन पत्नी अपने राजा से नहीं बल्कि अपने ही दरबार के एक दरवारी से प्यार कराती थी और दरबारी रानी से नहीं बल्कि एक वेश्या से प्यार करता था और वेश्या दरबारी से नहीं बल्कि अपने राज्य के राजा से प्यार करती थी . कहानी इस प्रकार है ----- एक दिन राजा के दरबार में एक संत आया और उसने राजा को एक फल ( fruit ) दिया जो उसने लम्बे तपस्या के पश्चात पाया था फल की विशेषता थी की जो इस फल की खायेगा ओ चीर युवा और अमर रहेगा . फल लेने के बाद राजा ने सोचा मैं यह फल अपनी पत्नी को खिलायुन्गा जिससे ओ चिर युवा और अमर रहेगी . तो राजा ने फल अपनी प्यारी पत्नी को दे दिया फल पत्नी पाकर सोचने लगी मै खाकर क्या करूंगी इस फल की मैं अपने प्रेमी दरबारी को दे देती हूँ जिसे खाकर ओ चिरयुवा और अमर रहेगा . दरबरी को जब फल मिला तो सोचने लगा की मैं क्यों न इस फल को उस वेश्या को दे दू जिसके पास मैं हमेशा जाता हूँ. और उसने इस फल को वेश्या को दे दिया . जब ओ फल वेश्या को मिला ओ सोचने लगी की मै इस फल को खाकर क्या करुँगी मुझे जिन्दगी भर कुकर्म करना पड़ेगा इसलिए इस फल को मैं नही खायूंगी . मेरा राज्य का राजा सबसे अच्छा है ओ जनता का पालन पोषण सही तरीके सा करता है इसलिए यह फल राजा को दे देना चाहिए इस प्रकार वेश्या उस फल को लेकर राजा के पास आ जाती है और राजा को बताती है . राजा फल को देखकर और सारी कहानी सुनकर आश्चर्य चकित हो जाता है .
No comments:
Post a Comment