एक रजा अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता था लेकिन पत्नी अपने राजा से नहीं बल्कि अपने ही दरबार के एक दरवारी से प्यार कराती थी और दरबारी रानी से नहीं बल्कि एक वेश्या से प्यार करता था और वेश्या दरबारी से नहीं बल्कि अपने राज्य के राजा से प्यार करती थी . कहानी इस प्रकार है ----- एक दिन राजा के दरबार में एक संत आया और उसने राजा को एक फल ( fruit ) दिया जो उसने लम्बे तपस्या के पश्चात पाया था फल की विशेषता थी की जो इस फल की खायेगा ओ चीर युवा और अमर रहेगा . फल लेने के बाद राजा ने सोचा मैं यह फल अपनी पत्नी को खिलायुन्गा जिससे ओ चिर युवा और अमर रहेगी . तो राजा ने फल अपनी प्यारी पत्नी को दे दिया फल पत्नी पाकर सोचने लगी मै खाकर क्या करूंगी इस फल की मैं अपने प्रेमी दरबारी को दे देती हूँ जिसे खाकर ओ चिरयुवा और अमर रहेगा . दरबरी को जब फल मिला तो सोचने लगा की मैं क्यों न इस फल को उस वेश्या को दे दू जिसके पास मैं हमेशा जाता हूँ. और उसने इस फल को वेश्या को दे दिया . जब ओ फल वेश्या को मिला ओ सोचने लगी की मै इस फल को खाकर क्या करुँगी मुझे जिन्दगी भर कुकर्म करना पड़ेगा इसलिए इस फल को मैं नही खायूंगी . मेरा राज्य का राजा सबसे अच्छा है ओ जनता का पालन पोषण सही तरीके सा करता है इसलिए यह फल राजा को दे देना चाहिए इस प्रकार वेश्या उस फल को लेकर राजा के पास आ जाती है और राजा को बताती है . राजा फल को देखकर और सारी कहानी सुनकर आश्चर्य चकित हो जाता है .
Sunday, 11 March 2012
Wednesday, 7 March 2012
उतरप्रदेश और उतराखंड में भारतीय जनता पार्टी की हार से यह बिलकुल स्पष्ट हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी के लिए दिल्ली की गद्दी कोसो दूर है अपने मन को सांत्वना देने के लिए पार्टी का नेता कुछ भी कह ले लेकिन सचाई यह है की उतरप्रदेश और उतराखंड में पार्टी का सामाजिक आधार ख़त्म हो चूका है . भारतीय जनता पार्टी में दूसरी पंक्ति के तमाम नेता विद्वान् है लेकिन नरेन्द्र मोदी को छोड़ कर कोई भी नेता चाहे जेतली जी हो , राजनाथ सिंह जी हो , मुरली मनोहर जोशी हो , रवि शंकर प्रसाद हो किसी भी नेता की छवि रास्ट्रीय छवि नहीं बन पाई है चाहे वो माने या न माने लेकिन जनता के लिए सचाई यही है . श्री नरेन्द्र मोदी जी का जनाधार तमाम नेताओ की तुलना में अधिक है लेकिन दूसरी पंक्ति का कोई भी नेता नरेन्द्र मोदी को नेता मानाने से हिचकिचाते है .अगर नरेंद्र मोदी जी को प्रधान मंत्री के रूप पेश कर के चुनाव लड़ा जाय तो पार्टी की जित हो सकती है
कल मैंने गडकरी साहब की प्रेस कांफ्रेंस देखा .प्रेस कांफ्रेंस के दौरान जिस तरह रविशंकर प्रसाद जी पत्रकारों को सवाल पूछने के मौका दे रहे थे तो ऐसा लगता था की प्रेस कांफ्रेंस गडकरी की नहीं रवि शंकर प्रसाद की हो रही है जिस तारा गडकरी साहव को रोकते थे उसको देखने से ऐसा ही लगता था की पार्टी की वरिष्ट नेता गडकरी नहीं रवि शंकर प्रसाद है .मैंने वहुत से पार्टी अधक्ष की कांफ्रेंस को देखा है लेकिन किसी भी पार्टी में ऐसा नहीं होता है . अगर वरिष्ट नेता बोलता है तो कोई भी नेता बिच में नहीं बोलता है लेकिन रवि शंकर प्रसाद को क्या सूझ रहा था वो तो वहीजनते होंगे . vataनुकुलित कच्छ में योजना बनाकर और हेलीकाप्टर से मंच पर आकार प्रवचन दे देने से पार्टी की कभी जित नही हो सकती है जितने ले लिए के लिए गावों में जाना होगा ग्रामीण लकड़ो को पार्टी से जोड़ना होगा तभी जाकर जित हो सकती है .
कल मैंने गडकरी साहब की प्रेस कांफ्रेंस देखा .प्रेस कांफ्रेंस के दौरान जिस तरह रविशंकर प्रसाद जी पत्रकारों को सवाल पूछने के मौका दे रहे थे तो ऐसा लगता था की प्रेस कांफ्रेंस गडकरी की नहीं रवि शंकर प्रसाद की हो रही है जिस तारा गडकरी साहव को रोकते थे उसको देखने से ऐसा ही लगता था की पार्टी की वरिष्ट नेता गडकरी नहीं रवि शंकर प्रसाद है .मैंने वहुत से पार्टी अधक्ष की कांफ्रेंस को देखा है लेकिन किसी भी पार्टी में ऐसा नहीं होता है . अगर वरिष्ट नेता बोलता है तो कोई भी नेता बिच में नहीं बोलता है लेकिन रवि शंकर प्रसाद को क्या सूझ रहा था वो तो वहीजनते होंगे . vataनुकुलित कच्छ में योजना बनाकर और हेलीकाप्टर से मंच पर आकार प्रवचन दे देने से पार्टी की कभी जित नही हो सकती है जितने ले लिए के लिए गावों में जाना होगा ग्रामीण लकड़ो को पार्टी से जोड़ना होगा तभी जाकर जित हो सकती है .
Tuesday, 10 January 2012
भ्रष्टाचार और कानून
भ्रष्टाचार सिर्फ हिंदुस्तान की ही समस्या नहीं बल्कि यह पुरे दुनिया की हर मुल्क की एक सबसे बड़ी समस्या है . दुनिया के अधिकांश बड़े नेता , प्रायः सभी (कुछ को छोड़कर ) पदाधिकारी कही न कही भ्रष्टाचार में लिप्त है .तो क्या भ्रष्टाचार को रोकने के लिए दुनिया के किसी भी मुल्क में कोई सख्त कानून नहीं है.मेरा मानना है कि ' है".पर क्यों नहीं होता भ्रष्टाचार दूर ? एक ही कारण है कि कानून से भ्रष्टाचार दूर नहीं होता भ्रष्टाचार दूर तभी होगा जब व्यवस्थापिका न्यायपालिका और कार्यपालिका के पदों पर बैठा व्यक्ति चरित्रवान .निष्ठावान और .देशभक्त होगा . इन सबको देशभक्ति कि शिक्षा नैतिक शिक्षा देने कि जरुरत है .
मै कुछ उदहारण देकर स्पष्ट करना चाहूँगा . राजा हरिश्चंद्र ने सपने में इक वादा किया था और उस वादे को उन्होंने सुबह में पूरा कर दिया . ओ वादा इसलिए नहीं पुरे किये को ओ कानून से डरते थे उन्होंने इसलिए वादा पुरे किये कि कल राज्य कि जनता ये न कहे कि राजा अपने दिए हुए वचनों से मुकर जाता है .जनता का राजा के ऊपर से भरोसा न उठ जाये इसलिए पालन किया . उन्होंने राजधर्म का पालन करते हुए अपना वादा पूरा कर दिया परन्तु आज के नेता दिन में किये हुए वादा पुरे नहीं करते .
भगवान राम ने राज धर्म पालन किया और एक प्रजा के कहने पर अपनी प्यारी पत्नी को सीता को महल से निकल दिया .ओ कानून से नहीं बल्कि धर्म , राज धर्म से डरते थे .
चाद्क्य ने चन्द्र गुप्त मौर्या को धार्मिक और राजनैतिक शिक्षा देकर चन्द्रगुप्त को भारत का सर्वश्रेष्ट शासक बना दिया
हमारे नेताओं को भी धर्म की शिक्षा देना जरुरी है उन्हें रामचरित मानस पढने के लिए उत्साहित करना पड़ेगा तब जाकर उनके चरित्र और स्वभाव में बदलाव आएगा . चाद्क्य जैसे विद्वान् शिक्षक के सानिध्य में शिक्षा ग्रहण करना पड़ेगा उन्हें धर्म निरपेक्ष नहीं धर्मसपेक्षा बनाना पड़ेगा . हिन्दुस्तान का गौरव मयी इतिहास , शिवी धतिची और राजा बलि की कहानी से इनको अवगत करना पड़ेगा तभी जाकर हमारे नेताओं के चरित्र और स्वभाव में बदलाव आएगा और ओ राम और हरीश्चन्द्र की तरह राजधर्म का पालन करेंगे और भ्रष्टाचार से दूर रहेंगे और संत आत्माओं की भाति कम करेंगे और भारत फिर से दुनिया का गुरु बन जायेगा जय हिंद
मै कुछ उदहारण देकर स्पष्ट करना चाहूँगा . राजा हरिश्चंद्र ने सपने में इक वादा किया था और उस वादे को उन्होंने सुबह में पूरा कर दिया . ओ वादा इसलिए नहीं पुरे किये को ओ कानून से डरते थे उन्होंने इसलिए वादा पुरे किये कि कल राज्य कि जनता ये न कहे कि राजा अपने दिए हुए वचनों से मुकर जाता है .जनता का राजा के ऊपर से भरोसा न उठ जाये इसलिए पालन किया . उन्होंने राजधर्म का पालन करते हुए अपना वादा पूरा कर दिया परन्तु आज के नेता दिन में किये हुए वादा पुरे नहीं करते .
भगवान राम ने राज धर्म पालन किया और एक प्रजा के कहने पर अपनी प्यारी पत्नी को सीता को महल से निकल दिया .ओ कानून से नहीं बल्कि धर्म , राज धर्म से डरते थे .
चाद्क्य ने चन्द्र गुप्त मौर्या को धार्मिक और राजनैतिक शिक्षा देकर चन्द्रगुप्त को भारत का सर्वश्रेष्ट शासक बना दिया
हमारे नेताओं को भी धर्म की शिक्षा देना जरुरी है उन्हें रामचरित मानस पढने के लिए उत्साहित करना पड़ेगा तब जाकर उनके चरित्र और स्वभाव में बदलाव आएगा . चाद्क्य जैसे विद्वान् शिक्षक के सानिध्य में शिक्षा ग्रहण करना पड़ेगा उन्हें धर्म निरपेक्ष नहीं धर्मसपेक्षा बनाना पड़ेगा . हिन्दुस्तान का गौरव मयी इतिहास , शिवी धतिची और राजा बलि की कहानी से इनको अवगत करना पड़ेगा तभी जाकर हमारे नेताओं के चरित्र और स्वभाव में बदलाव आएगा और ओ राम और हरीश्चन्द्र की तरह राजधर्म का पालन करेंगे और भ्रष्टाचार से दूर रहेंगे और संत आत्माओं की भाति कम करेंगे और भारत फिर से दुनिया का गुरु बन जायेगा जय हिंद
Sunday, 25 September 2011
Monday, 22 August 2011
मन की व्यथा मैं किससे , हर पल के जा सुनाऊ
क्या उम्र भर मैं यों ही इस दिल को यूँ तडपाउ
भटका हुआ मुशाफिर था फिर क्यों डगर पे लायी
बनना ना हमसफर था,फिर क्यों तू दिल लगायी
जिंदगी के हर रात के सपनों में तुम तो आती हो
पास आकर मुस्कराकर फिर दूर चली जाती हो
तेरा मिलाना, तेरा मुस्कराना मुझे आज भी यद् आती है
तेर तन का सुगंध सांसों का गंध एहसास बन तडपती है
दुनिया के हर झंजावत को मैं तो झेल जाऊंगा
हो तेरा इशारा तो ,सागर के पार भी आऊंगा
मैं तो सब्र कर लेता हूँ प़र इस नादान दिल को समझायुं कैसे
पैरों में मेरे बंधन है तड़पते इस दिल को बताऊँ कैसे
कितनी हशरत से देखा था तुने मुझे,उस लम्हों को दिल से भुलाऊँ कैसे
निगाहे तोतुमसे यूँ मिलती ही है प़र आवाज देकर बुलाऊँ कैसे
Saturday, 16 April 2011
दोस्तो अन्ना ह्ज़ारे जी ने गुजरात कें मुख्यमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी की प्रशंसा किया तो कांग्रेस पार्टी को बुरा क्यो लगाने लगा. अन्ना जी ने जो कुछ कहा ओ तो बहुत कम है . वास्तव मे नरेन्द्र मोदी तो गुजरात का भगवान है. जितनी शांति और चैन गुजरात मे है उतनी शांति देश के किसी भी हिस्सा मे नही है. अगर किसी को भरोसा नही है तो गुजरात मे आकर देखे. उसके बाद वह खुद कहेगा .----- नरेंद्रा मोदी जिंदाबाद ---पानी ,बिजली सुशासन , व्यापार , सड़के बहुत कुच्छ नरेंद्रा मोदी ने दिया .
कांग्रेश को तो शीला दीक्षित अच्छी लगती है जहाँ आए दिंन लकड़ियों के साथ बलात्कार होता है हर रोज हत्या और अपहरण होता है फिर भी शीला जी कांग्रेस की नजरो मे महान है .मेरे ख्याल से आगार गुजरात मे भी आए दिन लूट मार होता तो शायद मोदी जी भी कांग्रेस के नजरो मे महान होते . यह सच्चाई है .इतिहास गवाह है कांग्रीसः को कभी सुशासन अच्छा नाही लगता.यही वजह है की कांग्रेश अपने तमामा शासन काल मे दंगा और आतंकवाद को प्रश्रय दिया.कश्मीर आजादी के दिंन से लेकर आज तक जल रहा है .क्या वह नरेंद्रा मोदी का देन है . बिहार के भागलपुर मे जो दंगे हुए थे तो क्या उसमे भी नरेंद्रा मोदी जी के हाथ थे .पंजाब मे सीखो के साथ जो कुच्छ हुया . क्या उसमे भी नरेंद्रा मोदी थे .देश के पूरब से लेकर पस्चिम तक उतर से लेकर दक्षिण तक आरंकवाद , नक्सलवाद,दंगे,घोटाला अब तक जीतने भी हुए उसके लिए कौन जिमेदार है.
माननीय राहुल जी कहते है की हिन्दुस्तान मे दो देश निवास करता एक ग़रीबो की दुनिया और एक अमीरो की, मैं राहुल जी से जानना चाहता हूँ की यह अमीरो और ग़रीबो की दो दुनिया किसने बनाया . क्या इसके लिए आदरणीय पंडित नेहरू जी , स्वर्गीया इंदिरा जी या फिर सावर्गीय राजीव गांधी जी जिमेआदर है या फिर इन सबके लिए नरेंद्रा मोदी जिमेदार है. जरा ठंडा दिमाग से सोचिए .जो अच्छा कार्य कारते है उनको अच्छा बोलना ही चाहिए जो बुरा करता है उसे बुरा ही कहा जाएगा .
कांग्रेश को तो शीला दीक्षित अच्छी लगती है जहाँ आए दिंन लकड़ियों के साथ बलात्कार होता है हर रोज हत्या और अपहरण होता है फिर भी शीला जी कांग्रेस की नजरो मे महान है .मेरे ख्याल से आगार गुजरात मे भी आए दिन लूट मार होता तो शायद मोदी जी भी कांग्रेस के नजरो मे महान होते . यह सच्चाई है .इतिहास गवाह है कांग्रीसः को कभी सुशासन अच्छा नाही लगता.यही वजह है की कांग्रेश अपने तमामा शासन काल मे दंगा और आतंकवाद को प्रश्रय दिया.कश्मीर आजादी के दिंन से लेकर आज तक जल रहा है .क्या वह नरेंद्रा मोदी का देन है . बिहार के भागलपुर मे जो दंगे हुए थे तो क्या उसमे भी नरेंद्रा मोदी जी के हाथ थे .पंजाब मे सीखो के साथ जो कुच्छ हुया . क्या उसमे भी नरेंद्रा मोदी थे .देश के पूरब से लेकर पस्चिम तक उतर से लेकर दक्षिण तक आरंकवाद , नक्सलवाद,दंगे,घोटाला अब तक जीतने भी हुए उसके लिए कौन जिमेदार है.
माननीय राहुल जी कहते है की हिन्दुस्तान मे दो देश निवास करता एक ग़रीबो की दुनिया और एक अमीरो की, मैं राहुल जी से जानना चाहता हूँ की यह अमीरो और ग़रीबो की दो दुनिया किसने बनाया . क्या इसके लिए आदरणीय पंडित नेहरू जी , स्वर्गीया इंदिरा जी या फिर सावर्गीय राजीव गांधी जी जिमेआदर है या फिर इन सबके लिए नरेंद्रा मोदी जिमेदार है. जरा ठंडा दिमाग से सोचिए .जो अच्छा कार्य कारते है उनको अच्छा बोलना ही चाहिए जो बुरा करता है उसे बुरा ही कहा जाएगा .
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